Chittorgarh Rajasthan - Travel With Chinmay - Udaipur Rajasthan India.
Chittorgarh fort:-
The epitome of Romance and valour.
Overview:-
A world famous extensive Chittorgarh fort is fortified citadel ravaged three times when women committed JOHAR, self immolation themselves, while the men folk donned in saffron robes of martyrdom rode out to face certain death.
A extremely cruel invader Allauddin Khilji was the first to sack Chittorgarh in 1303 A.D. As per the legend that he was by the regal beauty of queen Padmini, he was overpowered by a desire to possess her. But the noble queen preferred death to dishonor and committed JOHAR, self-immolation. The victim was Chittor, which came under the sword of the marauder.
Chittore was never inhabited again, but the pride, glory and the royal past is still alive and reflecting
in the fort itself. One can witness temples, spectacular Chattris, towers, water bodies and awe inspiring places.
Tour time is about 6 hours as the fort exists at a distance of 120 k.m. one sided.
To know more and explore Chittorgarh - Contact:- Travel With Chinmay - Udaipur
Mobile:- +91 94141 64680
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
प्रेम, वीरता और बलिदान की जीवंत गाथा
मेवाड़ की धरती पर भव्य रूप से स्थित चित्तौड़गढ़ दुर्ग केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं है, बल्कि यह वीरता, त्याग, सम्मान, स्वाभिमान और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है।
इस विशाल दुर्ग ने इतिहास में तीन बड़े आक्रमण और घेराबंदियां देखीं। मेवाड़ की परंपरागत कथाओं के अनुसार, जब पराजय निश्चित दिखाई देती थी, तब महिलाओं ने जौहर कर अपने सम्मान की रक्षा के लिए आत्मबलिदान दिया और पुरुष केसरिया वस्त्र धारण कर रणभूमि में निश्चित मृत्यु का सामना करने निकल पड़ते थे।
1303 ईस्वी में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने लंबे और भीषण युद्ध के बाद चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया। इस घटना के साथ रानी पद्मिनी की प्रसिद्ध गाथा भी जुड़ी हुई है। पद्मिनी की कथा का ऐतिहासिक स्वरूप आज भी विद्वानों के बीच चर्चा का विषय है, लेकिन लोकपरंपरा में वह सम्मान, साहस और आत्मबलिदान की अमर प्रतीक बन चुकी हैं।
चित्तौड़ ने हर त्रासदी के बाद अपने अस्तित्व और गौरव को जीवित रखा। यही मेवाड़ की आत्मा—स्वाभिमान, साहस और विपरीत परिस्थितियों में भी न झुकने की भावना है।
आज यह विशाल दुर्ग हमें इतिहास की अनेक परतों से रूबरू कराता है। यहां भव्य विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ, प्राचीन मंदिर, छतरियां, महल, विशाल जलाशय और अनेक ऐतिहासिक स्थल हैं। दुर्ग का प्रत्येक द्वार, प्रत्येक पत्थर और प्रत्येक स्मारक अपने भीतर मेवाड़ की कोई न कोई कहानी समेटे हुए है।
🏰 Travel With Chinmay के साथ चित्तौड़गढ़ को जानिए
चित्तौड़गढ़, उदयपुर से लगभग 120 किलोमीटर एक तरफ स्थित है। दुर्ग और इसके प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों को समझने और देखने के लिए लगभग 6 घंटे या उससे अधिक का समय रखना उचित है।
चित्तौड़गढ़ केवल देखने की जगह नहीं है—
यह इतिहास को महसूस करने, कहानियों को समझने और मेवाड़ की वीर आत्मा को अनुभव करने का स्थान है।
Travel With Chinmay – Udaipur
हम केवल स्मारक नहीं दिखाते, उनकी कहानियों को जीवंत करते हैं।
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